बुग्याल बचाओं अभियान 2015

CPBCED

पनार बुग्याल से रूद्रनाथ तक

बुग्याल बचाओं अभियान के तहत केदारनाथ कस्तूरी मृग अभयारण्य के इलाके में आने वाले उच्च हिमालय के सुन्दरतम इलाके में अगस्त 2015 में रक्षाबंधन के मौके पर पनार एवं रूद्रनाथ बुग्याल क्षेत्र में जनजागरूकता एवं पौलीथीन उन्मूलन के लिए सफाई अभियान संचालित किया गया। सीपीबी पर्यावरण एवं विकास केन्द्र गोपेश्वर की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, वन कर्मियों,शिक्षकों एवं छात्रों ने जबरदस्त उत्साह के साथ गोपेश्वर के समीप सगर गांव से लेकर पनार तक पौलीथीन नियंत्रण के लिए साफ सफाई एवं 18 किलोमीटर पैदल मार्ग पर रैली निकाली।
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के इतिहास विभाग के डा. एस.एस. रावत के नेतृत्व में चौदह सदस्यीय दल में महाविद्यालय के नौ छात्रों समेत, केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के वनकर्मियों, शिक्षकों एवं पत्रकार ने दो दिन तक समुद्रतल से पांच हजार फुट पर स्थित सगर गांव से पर्यावरण, वन सम्बर्द्वन एवं बुग्लालों के संरक्षण को लेकर बने नारों के उद्घोषों के साथ अभियान की शुरूवात की। सगर गांव से रूद्रनाथ के बीच ग्याहर हजार फुट की ऊचाई पर स्थित पित्र धार में भी सगर की तरह ही उत्साह के साथ बुग्याल बचाओं अभियान के तहत रैली निकाली और प्लास्कि तथा अजैविक कुड़े का संग्रह किया।
बुग्याल बचाओं अभियान का नेतृत्व करने वाले राजकीय स्नात्कोत्तर विभाग के एनएसएस के समन्यवक एवे इतिहासविद्व डा. एस.एस. रावत ने बताया कि अभियान के दौरान छात्रों ने रैली एवं प्लास्टिक पौलीथीन की सफाई के साथ देश के सुन्दरतम अभयारण्यों में एक केदारनाथ कस्तूरी मृग अभयारण्य के वन, वनस्पति एवं वन्यजीवों का अध्ययन भी अभियान में शामिल छात्रों ने किया। महाविद्यालय में विज्ञान की स्नातक कक्षा के छात्र विनोद ंिसह और बी.ए.द्वितीय वर्ष के छात्र बीरेन्द्र सिंह ने बताया कि अभियान के दौरान केदारनाथ कस्तूरी मृग अभयारण्य के वन और वनस्पति का आकलन करने की भी कोशिश की। सगर से पनार बुग्याल के बीच रास्ते के दोनों और मोरू, खरसू, बुराश, रांगा के जंगल तो दिखे ही पहली बार इस जंगल के अंदर चीनार की प्रजाति वाले काचुला के पेड़ की भी जानकारी मिली। सुरेन्द्र गड़िया और चन्दन गड़िया ने बताया जिस तरह से प्रकृति ने इस इलाके में अपना खजाना विखेरा है ऐसा बहुत कम स्थानों पर दिखता है। पनार को छोड़ दे तो इस पूरे इलाके में बुग्यालों की स्थिति बेहतर हैं। पनार में अवारा पशुओं के छोड़े जाने से बुग्याल की स्थिति धीरे-धीेरे खराब होने की ओर हैं। कुंवर सिंह और अजय सिंह का कहना था कि इन सुन्दरतम बुग्यालों को बचाने के लिए अभी से कारगर तंत्र बनाया जाना चहिए जिससे ये सुन्दरतम इलाके भविष्य में भी इसी तरह हमारे पारिस्थतिकीय तंत्र की बेहतरी में योगदान देते रहे। पवन राणा,प्रकाश सिंह ओर अंकित का कहना था कि बुग्यालों में मानवीय हस्तक्षेप के कारण जो गड़बड़ी हो रही है उसे कम करने के लिए स्थानीय स्तर पर स्थानीय लोगों के सहयोग से कार्यक्रम बनाये जाय तो बुग्यालों का संरक्षण बेहतर हो सकता है। इससे इस क्षेत्र में बुग्यालों में अति-चराई के कारण बुग्यालों की अवनति की समस्या दिख रही है उसका भी निस्तारण होगा और अजैविक कुड़े कचरे के डेरों में बदल रहे बुग्यालों के हिस्से भी फिर से हरे-भरे हो सकते हैं।

रूद्रप्रयाग से अभियान में शामिल होने आये पर्यावरण प्रेमी शिक्षक सतेन्द्र सिंह भण्डारी एवं अमर उजाला चमोली के व्यूरों प्रमुख प्रमोद सेमवान ने भी स्थानीय लोगों की भागीदारी के जरिये इस सुन्दरतम इलाके को संरक्षित करने के लिए कार्यक्रम बनाये जाने की जरूरत बतायी इनका कहना था कि कार्यक्रम इस तरह के बने जिससे वन, बुग्याल और वन्यजीवों के संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों की आजीविका का संबर्द्वन भी हो।

अभियान दल में ओमप्रकाश भट्ट एवं केदारनाथ कस्तूरी मृग अभ्यारण्य के वन्यजीव प्रतिपालक पृथ्वी सिह नेगी भी शामिल थे।
————————
ओमप्रकाश भट्ट
प्रबंध न्यासी
सीपी भट्ट पर्यावरण एवं विकास केन्द्र
गोपेश्वर।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *