बुग्याल बचाओं अभियान 2014

CPBCED

बैदनी बुग्याल में पर्यटन एवं तीर्थाटन गतिविधियों के अध्ययन एवं अजैविक कुड़ा निस्तारण अभियान की संक्षिप्त रिपोर्ट।

 

नन्दादेवी राजजात यात्रा देश के सुन्दरतम बुग्याली इलाकों में एक माने जाने वाले आलीबैदनी बुग्याल से होकर गुजरी है। यात्रा के दौरान बैदनी बुग्याल में तीन दिनों तक हजारो लोगों का जमावाड़ा लगा रहा इससे आली से लेकर बैदनी और उससे आगे पातरनचौणी तक फैले बुग्याली इलाके में तीन दिनों तक मेले जैसे माहौल बन हुआ था। इन तीन दिनों में अचानक बढ़ी श्रद्वालुओं की संख्या के कारण हिमालय के ये सुन्दरतम इलाके कचरे और गंदगी के ढेर में तब्दील हो गए। राजजात यात्रा से लौटने वाले तीर्थयात्रियों, पर्यटनकों, एवं अखबारों के जरिये इन सुन्दरतम इलाके में अजैविक गंदगी की स्थिति की जो जानकारी मिल रही थी उससे इस इलाके में इस तरह के विगाड़ को कम करने के लिए अपने स्तर से पहल करने का कार्यक्रम बनाने के लिए जागों हिमालय समिति थराली एवं टस्ट के कोषध्यक्ष एवं टस्टी मंगला कोठियाल जी ने पहल करने का सुझाव रखा। सीपीबी सेन्टर फार इन्वाईरमेंट टस्ट की न्यासी मण्डल की बैठक में श्री मंगला कोठियाल को इस कार्यक्रम को संचालित करने की जिम्मेदारी दी गई। तय किया गया कि अधिकतम दस लोगों का दल बैदनी बुग्याल इलाके में नन्दादेवी राजजात के बाद अजैविक कुड़े एवं अन्य गतिवितिधयों से बुग्याल क्षेत्र को हो रहे नुकसान का अध्ययन करने जायेगा। अध्ययन के साथसाथ प्रतीकात्मक रूप से एक दिन बैदनी बुग्याल के एक इलाके में अजैविक कुड़ा हटाने के लिए श्रमदान भी करेगा। इसी के तहत 27 एवं 28 सितम्बर को टस्ट की ओर से दो दिवसीय बुग्याल संरक्षण अभियान की शुरूवात की गई।

बैदनी बुग्याल संरक्षण के लिए दो दिवसीय अभियान में टस्ट के साथ थराली की जागों हिमालय लोक कल्याण समिति, वन विभाग के समर्पित अधिकारी, अधिवक्ता, पत्रकार एवं पर्यावरण संरक्षण सामाजिक कार्यो के लिए समर्पित शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। जिनके नाम इस प्रकार है।

  1. श्री मंगला कोठियाल जी टस्टी एवं समन्वयक, बैदनी बुग्याल संरक्षण अभियान गोपेश्वर
  2. श्री भवान सिंह चौहान वरिष्ट अधिवक्ता एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य गोपेश्वर
  3. श्री त्रिलोक सिंह बिष्ट जी वन एवं वन्यजीव प्रेमी एवं फारेस्टर बदरीनाथ वन प्रभाग देवाल
  4. श्री रमेश थपलियाल जी, सचिव जागों हिमालय लोक कल्याण समिति थराली
  5. श्री धनसिंह घरिया पर्यावरणप्रेमी शिक्षक एवं प्रवक्ता राजकीय इण्टर कालेज गोदली पोखरी
  6. श्री सतेन्द्र सिंह भण्डारी पर्यावरणप्रेमी शिक्षक एवं सहायक अध्यापक रा.प्रा.वि. जशोली रूद्रप्रयाग
  7. श्री राकेश सती, सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार दैनिक जागरण नारायणबगड़
  8. श्री नारायण सिंह गोपेश्वर
  9. श्री अजय सिंह दशोली ग्राम स्वराज्य मण्डल गोपेश्वर
  10. श्री ओमप्रकाश भटट, प्रबंध न्यासी सी.पी.बी.
  11. श्री मदन सिंह बिष्ट, वन कर्मी बदरीनाथ वन प्रभाग, बैदनी
  12. श्री इन्द्रसिंह, भेड़पालक ग्राम वाण हाल बैदनी

अभियान दल 27 सितम्बर की सुबह चार बजे गोपेश्वर से बैदनी बुग्याल के लिए रवाना हुआ। ग्यारह बजे सुबह वाण गांव पहुंचे, जहां स्थानीय ग्रामवाशियों से जनसम्पर्क तथा वन पर्यावरण संरक्षण को लेकर नारे लगाते हुए बैदनी बुग्याल के लिए प्रस्थान किया।

नन्दादेवी राजजात यात्रा का प्रभाव थराली से आगे से ही दिखने लगा था। यात्रा के कारण इस इलाके में आधारभूत संरचनायें जिनमें बिजली,पानी और सड़कों की हालत पहले से बेहतर बनी हुई थी। देवाल से लेकर वाण तक भूस्खलन के स्फाट के बाद भी मोटर सड़क अन्य इलाको के मुकाबले बेहतर दिखी। वाण में बस स्टेशन पर उतरे जहां पहुंचते ही जगहजगह विखरे अजैविक और जैविक कुड़े ने नन्दादेवी राजजात में भीड़भाड़ और उसके दुष्प्रभाव किस तरह झेलने पड़ते है इस कुड़े के रूप में देखने को मिला। वाण से पहले कहीं ऐसी स्थिति नहीं थी लेकिन वाण में जहां पर हमने जीप छोड़कर पैदल यात्रा शुरू की वहा बस स्टेशन के आसपास तो कुड़ा विखरा था ही सार्वजनिक शौचालय के उपर भी बंद, ब्रेड और अन्य अनपयुक्त बैकरी की खादय वस्तुओं के ढेर और प्लास्टिक की बोतले यात्रा के जाने के तकरीबन पच्चीस दिन बाद भी छत पर सड़ रही थी। पैदल रास्ते में रणकधार कुड़े के ढेर थे जहांजहां यात्रियों को रूकने की व्यवस्था की गई होगी उसके आसपास कुड़ा अधिक था। लाटु देवता के मन्दिर के नीचे रास्ते पर बना छोटा सा लाटु के मन्दिर के आसपास तो सबसे अधिक कुड़ा था जो अजैविक ही ज्यादा।

रणकधार से गैरोली पातल के बीच सफाई हो रखी थी कुड़े के कुछएक रैपरों के अलावा गंदगी काफी कम थी। लेकिन गैरोली पातल पहुंचते ही सुन्दर वन क्षेत्र भारी भीड़ से किस तरह गंदगी ओर दलदल में बदल सकता है यह देखने को मिला। गैरोली पातल से एक किलोमीटर पहले से अजैविक कुड़ा खासतौर पर खाने की सामान के प्लास्टिक के रैपर, पानी और जूस और शराब की बोतले कहीं ढेर में छुपायी हुई थी तो कई ऐसे ही बिखरी हुई फैली हुई थी। गैरोली पालत को जाने वाली बटिया के दोनो तरफ दस से बीस मीटर का इलाका भारी आवागमन के कारण दलदल में बदल चुका था। गैरोली पातल में बिखरे कुड़े को तो साफ कर दिया था लेकिन उसे एकत्रित करके जंगल में फंक दिया गया था। गैरोली पातल के मुख्य पड़ाव से बीस मीटर दायी ओर अजैविक कुडे के ढेर के ढेर जमा किए थे।

बैदनी बुग्याल जो हमारे अभियान का लक्ष्य था मैं हम लोगों ने जैसे ही प्रवेश किया तो वहां भी गैरोली पातल की तरह ही बुग्याल के कुछ हिस्से से कुड़ा खासतौर पर अजैविक कुड़ा साफ किया हुआ है लेकिन अजैविक कुड़े के ये ढेर बुग्याल के निचले हिस्सों, बैदनी कुण्ड के समीप एक दर्जन से ज्यादा स्थानों पर फेंका हुआ था। कुड़े की इन ढेरों में नब्बे फीसदी अजैविक कुड़ा जिसमें प्लास्टिक और कांच की बोतले सबसे ज्यादा थी।

हम लोगों ने 28 सितम्बर की सुबह अध्यययन के साथसाथ अजैविक कुड़ा निस्तारण के लिए बैदनी कुण्ड के उपर बायी दिशा में नेहरू इन्स्टिटयूट आफ माउन्टेनियंरिग द्वारा स्थापित की गई टेंट कालोंनी के आसपास के इलाके को सफाई के लिए चुना। यहां से यात्रा के गुजरने के 28 दिन बाद भी बैदनी का कफसारी तोक का यह इलाका खाने पीने के खाली रैपरों से रंगीन बना था दूर से ही गंदगी दिखायी दे रही थी इसलिए इस इलाके की सफाई का निणर्य लिया गया। हम लोगों ने दस खाली बोरे गोपेश्वर से ही अपने साथ लाये थे। सभी लोगों ने एकएक खाली बोरा लिया और सुबह आठ बजे से बुग्याल से अजैविक कुड़ा निस्तारण कार्य में जुटे।

सफाई का यह अभियान कफसारी तोक निम की टेंट कालोनी और गायत्री परिवार द्वारा आयोजित भण्डारा स्थल से शुरू होकर बैदनी कुण्ड के समीप की घेरबाड़ की सफाई तक चलता रहा। दल ने दस बोरों में कबाड़ भरा और उसे अपने साथ वाण गांव तक लाये जहां से लोहाजंगमुंदोली में इण्डियाहाईक नामक कम्पनी के पास जमा की। इण्डिया हाईक यहां पथारोहण का आयोजनक करती हे इनके कार्यकर्ता भी टैकिंग के दौरान इस क्षेत्र में जमा प्लास्टिक को अपने साथ लाते हैं और बोरो में भरकर रिसाईकिल के लिए श्रषिकेश भेजते हैं। कुड़े का विधिवत निस्तारण हो जाय इसके लिए हमने कम्पनी के स्थानीय स्तर पर मुख्य प्रबंधक श्री सौम्य ज्योति पात्रा से अनुरोध किया जिन्होंने खुशी खुशी हमारे प्रस्ताव को स्वीकार किया और यह भी अश्वासन दिया की गांव के लोग या जो भी स्वयंसेवी रूप से उपर से प्लास्टिक का कचरा एकत्रित करके लाते हैं कम्पनी उस कुड़े के विधिवत निस्तारण के लिए मदद करेगी।

अनियोजित एवं अनियंत्रित तीर्थाटन एवं पर्यटन गतिविधियों का बुग्यालों पर असर

अभियान के दौरान वन क्षेत्र एवं बुग्यालों में सतही रूप से जो गड़बड़िया नजर आयी उनमें मुख्यतयाः

  • अजैविक कुड़े का बिखरा होना
  • वाण से लेकर रणकधार तक तथा गैरोली पातल, गैरोली पातल के आसपास के वन क्षेत्र तथा बैदनी में अजैविक कुड़ा अभी भी कई स्थानों पर बिखरा पड़ा है। बारिश के साथ छोटेछोटे प्लास्टिक के रूप में फैला कचरे के मिटटी में मिलने की प्रक्रिया तेज हो रही है खासतौर से प्लास्टिक के गिलास, थालिया आदि जो एक महीने में बारिश और ठण्ड के असर से टूट कर मिटी में मिल रही है जिसका दीर्घकालिक असर बुग्याली वनस्पतियों के पुर्नउत्पादन पर पड़ेगा।
  • आवासीय व्यवस्था के लिए बड़ी मात्रा में जंगलों एवं बुग्यालों में लगे टेंटों के लिए बुग्यालों की खुदायी से भूक्षरण का खतरा।
  • बुग्यालों में खासतौर से बैदनी में कई स्थानों मे टेंट कालोनी लगायी गई। टेंटों के चारो ओर से पानी की निकासी के लिए नालिया खोदी गई इससे बुग्यालों में कई स्थानों पर बारिश के साथ नालियां बन गई है जिनको अभी से पाटा नहीं गया तो भविष्य में ये बुग्यालों के भूक्षरण को बढ़ावा देने वाली साबित हो सकती हैं
  • कुछ स्थानों पर स्थानीय वन कर्मी श्री मदन सिंह इस काम को करने में जुटे थे लेकिन इसके लिए भी अभियान की तरह कार्य करने की जरूरत है।
  • सड़कों तथा आवासीय इलाको के आसपास भारी आवागमन से दल दल की स्थिति
  • नन्दादेवी राजजात में तीर्थयात्रियों का सबसे अधिक दबाव वाण से लेकर बैदनी तक रहा। गैरोली पातल में एक किलोमीटर पहले से ही पैदल बटिया के दोनों ओर इसका प्रभाव एकएक फुट गहरे खुदान के रूप में देखा जा सकता है। सबसे खराब स्थिति गैरोली में है लेकिन इसका असर बुग्याली इलाकों के पड़ाव पर भी इसी रूप् में पड़ा है।
  • नन्दादेवी राजजात के लिए बनायी गई संरचनाओं का यात्रा के बाद व्यवस्थित रूप से निस्तारण होने से बुग्यालों को हो रही क्षति
  • नन्दादेवी राजजात यात्रा में शामिल तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की व्यवस्था के लिए आधारभूत संरचनाओं का अस्थायी ढांचे खड़े किए गए थे जिनमें साफसफाई की व्यवस्था के शौचालय, पेयजल के जगहलगे पानी के टंकिया जैसे कई काम हुए थे। गैरोली पातल, और बैदनी में जगहजगह बने शौचालयों के लिए बुग्यालों की खुदायी कर जो मिटटी निकाली गई थी उसे बुग्याल में पहले जैसी स्थिति में नहीं लौटाया गया हे शौचालयों के लिए बने मिटटी के गढ़ढे खुले छोड़े गए है। यही हालत पानी के नलों और टोंटियों की है। कई स्थानों पर दूरदूर से पीने का पानी पाईपों के जरिये पड़ावों के नजदीक लाया गया। यात्रा गए हुए एक महीना होने वाला है लेकिन अभी तक इन पाईपों को बंद नहीं किया गया है इससे कई बुग्याली इलाके पानी बहने और उसकी प्राकतिक निकासी होने से दलदल में बदल गए हैं खासतौर पर कफसारी तोक में यह स्थिति बनी हुई है टीला के बीच का हिस्सा इस पानी से झील और दलदल में बदल चुका है।
  • बैदनी में बुग्याली बनस्पतियों के पुनर्जीवन पर संकट
  • भारी संख्या में कई दिनों तक जनदबाव के कारण बैदनी तथा आसपास के बुग्यालों पर पड़े प्रभाव यहां बुग्याली बनस्पतियों के पूर्णरूप से खिल पाने के रूप में चारो तरफ दिखायी दिया। छह से एक फुट तक उची उठी रहने वाली घास और अन्य वनस्पतियों से घिरे रहने वाले बैदनी ओर आसपास के इलाके में इस बार बनस्पतियों की अधिकतम उचाई छह ईच तक भी नहीं थी कई स्थानों पर बुग्याली घास के बजाय मिटटी ही ज्यादा दिख रही थी। पानी के आसपास के इलाके में भी बुग्याली बनस्पति अपनी पूर्णता के साथ नहीं खिल पायी थी।
  • बुग्यालों के संरक्षण में जुटे रहने वाले स्थानीय लोक संगठनों की भागीदारी होना
  • बुग्यालों के संरक्षण का पारम्परिक जिम्मा संभालने वाले स्थानीय ग्रामवाशी एवं ग्रामसंगठनों की भागीदारी की पहल होने से भी इस बार राजजात यात्रा के इस सुन्दरतम इलाकों में पर्यावरणीय दुष्प्रभावों का केवल ज्यादा असर अपितु देर तक दुष्प्रभाव का बना रहना भी इसी का नतीजा है।

अभी क्या हो सकता है

दल के सदस्यों ने बुग्याल की हालत और स्थानीय लोगों से इस मसले पर बात की जिसमें बुग्यालों के संरक्षण के लिए और खासतौर पर प्लास्टिक ओर अन्य अजैविक कुड़े से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए जो कदम उठाये जाने चाहिए उनमें मुख्यतः

1- जिस कम्पनी को साफसफाई का जिम्मा दिया गया है उसे जल्द ही अजैविक कुड़े के एकत्रीकरण करने तथा उसका विधिवत रिस्काईलिंग केन्द्रो तक ले जाकर निस्तारण करने के कार्य को सख्ती से लागु किया जाय।

2- यदि कम्पनी इस कार्य को नहीं करती तो स्थानीय ग्रामवाशी स्वयंसेवी रूप में बुग्याली इलाकों में इस कार्य को करने के लिए प्रेरित किए जाय। दल से वार्ता में वाण के ग्राम प्रधान श्री खीमी राम ने भी ग्रामवाशियों की ओर से अश्वासन दिया कि यदि इस तरह का कार्यक्रम तय किया जाता है तो वाण के सभी ग्रामवाशी इसके लिए सहयोग के लिए तैयार है। वन अधिकारी श्री त्रिलोकसिंह बिष्ट जी ने इस कार्य में पहल करने का अश्वासन दिया। इण्डिया हाईक कम्पनी लोहाजंग के स्थानीय मैनेजर सौम्य ज्योति पात्रा ने ग्रामवाशियों तथा स्वयंसेवी स्तर पर किए गए कुड़े को वाण से रिसाईकिलिंग केन्द्र तक ढुलान की जिम्मेदारी लेने पर सहमति जतायी है।

3- बुग्याली क्षेत्र में यथा बैदनी की दो कालोनियों के स्थान, पातरनचौड़िया, कैलुवा बिनायक, भगुवाशा के निवास स्थल के लिए इस यात्रा के दौरान प्रयुकत हुए स्थानों को दो से चार साल के लिए रिजनरेशन प्रक्रिया हेतु संरक्षित जोन बनाया जाय।

3- बुग्यालों खासतौर बैदनी से लेकर सुतोत तक के रूट के आसपास से कुड़ा निस्तारण हेतु स्थानीय ग्रामपचायतों, सामाजिक कायकर्ताओं ,शिक्षण संस्थाओं जिला प्रशासन वनविभाग की समन्वित बैठक कर स्वयंसेवी कार्यक्रम के लिए कार्ययोजना निमार्ण।

दीर्घकालीन उपाय

1-ग्रामसंगठनों के जरिये औली बैदनी इलाके में पर्यटन एवं तीर्थाटन को नियंत्रित एवं नियोजित किया जाय।

खासतौर पर वन विभाग एवं स्थानीय गांववाशियों के संगठन बुग्यालों में पर्यटन गतिविधियों की मानिटरिंग एवं साफसफाई की व्यवस्था के भागीदार बनाये जाय। पूर्व में वन विभाग के इस संबंध में दिए गए शासनादेशों के आधार पर इसे लागु किया जा सकता है।

2-बुग्यालों के प्रबंध के लिए वन एवं बुग्याल संरक्षण की कार्ययोजना बनायी जाय जिसके तहत पर्यटन एवं तीथार्टन गतिविधियों के कारण खतरे में पड़ चुके बुग्यालों का बारीबारी से सरंक्षित क्षेत्र घोषित कर वैज्ञानिक प्रबंधन का कार्य शुरू किया जाय।

3-अजैविक कुड़े के निस्तारण के लिए भ्यूडार ईको डेबलपमेंट समिति की तर्ज पर स्थानीय स्तर पर स्थानीय ग्राम संगठनों की मदद से कार्ययोजना बनायी जाय।

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ओमप्रकाश भटट

मैनेजिंग टस्टी

सीपीबी.सेंटर  फार ईन्वाईरमेंट एण्ड डेबलपमेंट

गोपेश्वर

रमेश थपलियाल

सचिव

जागों हिमालय लोक कल्याण समिति थराली

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