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श्रीमती श्यामादेवी स्मृति पर्यावरण व्याख्यान
इस व्याख्यान माला को शराबबंदी और वनआंदोलन में पायोनियर की भूमिका निभाने वाली स्व. श्रीमती श्यामादेवी भट्ट की स्मृति में आयोजित किया जाता है।
इस व्याख्यानमाला का आयोजन केन्द्र और राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोपेश्वर जो कि वर्तमान में श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के कैम्पस बन गया है के भूगर्भ विभाग की परिषद के साथ मिलकर किया जाता है।
व्याख्यानमाला के तहत दो लोकप्रिय व्याख्यान हो चुके हैं।स्व. श्रीमती श्यामा देवी भटट का संक्षिप्त जीवन परिचय एवं कार्य
इस सुदूरवर्ती इलाके में जब महिलाओं का घर से बाहर निकलना दूभर था उस दौर में इन्होंने महिलाओं को संगठित कर समाजिक कार्य में जुड़ने की प्रेरणा देने वाली श्रीमती श्यामा देवी का जन्म चमोली तहसील के मैठाणा गांव के सती परिवार में हुआ था। इनका विवाह छोटी उम्र में ही गोपेश्वर गांव में स्व. श्री नन्द भटट के साथ हुआ। विवाह के कुछ समय बाद ही पति की मृत्यु हो गई थी।
इन्होंने सामाजिक जीवन की शुरूआत 1961 के मई महीने में गोपेश्वर गांव में महिलाओ को संगठित कर महिला मंगल दल की स्थापना से की और संगठन की पहली अध्यक्ष बनी। इसके साथ वे सर्वोदय के कार्यो में जुटी। यहीं से शराबबंदी, महिला जागरण और वन संरक्षण के कार्य इनके जीवन के ध्येय बने। इस क्षेत्र में शराबबंदी की अलख जगाने वाली यह पहली महिला नेत्री थी, सर्वोदय कार्यकर्ताओं के साथ मार्च 1966 में रूद्रप्रयाग जिले के चंद्रापुरी में शराब की दूकान बन्द कराने के लिए पूरे महिने रात-दिन शराब की दुकान के आगे पिकेटिंग करती रही जिसके परिणामस्वरूप तत्कालीन राज्य सरकार को चन्द्रापुरी से शराब की दुकान हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा था। बाद में चटुवापीपल, तथा चमोली में भी शराबबंदी आंदोलन में शरीक हुई।
1971 में टिहरी शराबबंदी आंदोलन में चमोली जिले की दर्जनों महिलाओं के साथ भाग लिया तथा पूरे उत्तराखण्ड क्षेत्र में शराबबंदी के लिए जो चार सदस्यीय महिला प्रतिनिधि मण्डल तत्कालीन राष्ट्रपति मा. वी.वी. गिरी से मिला था उसमें नेतृत्वकारी भूमिका में सम्मिलित हुई तथा पूरे उत्तराखण्ड में शराबबन्दी लागू करने में सफल रही। इन्हीं के प्रयासों से दो दशक तक यह इलाका मध्यनिषेध क्षेत्र रहा।
बाल विधवा के रूप में पूरा जीवन समाज सेवा में सर्मपित करने वाली श्रीमती श्यामा देवी को इनके भतीजे स्व. सम्भूप्रसाद भटट, कुशलानन्द भटट तथा स्व. किशोरी प्रसाद भटट ने सार्वजनिक सेवा और कार्य के लिए हमेसा प्रोत्साहित किया। जिससे वे हमेसा सामाजिक कार्यो में बढ़ चढ़ कर भागीदारी निभाती रही। राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोदय सम्मेलन में भी प्रतिभाग करती रही। वर्ष 1971-72 में वनआंदोलन की रैलियों में शामिल रही।
वे चिपको आंदोलन की मात संस्था दशोली ग्राम स्वराज्य मण्डल की कई वर्षो तक सदस्य रही। गोपेश्वर से बदरीनाथ तक सामाजिक कार्यो के लिए अपनी महिला सदस्यों तथा तत्कालीन बालिका इण्टर कालेज की प्रधानाचार्य श्रीमती गंगोत्री गर्ब्याल के साथ जनजागरण एवं पदयात्रा में शामिल रही।
दिसम्बर 1973 में ‘‘फाटा-रामपुर चिपको आंदोलन’’ में गोपेश्वर से श्री अनुसूयाप्रसाद भटट के साथ श्रीमती श्यामादेवी, श्रीमती इन्द्रा देवी, श्रीमती जेठूली देवी, श्रीमती पार्वती देवी तथा जयन्ती देवी ने गोपेश्वर से फाटा पहुंच कर फाटा चिपको आंदोलन को नयी स्पूर्ति प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। जिसमें चिपको आंदोलन में महिला सक्रिय रूप से भागीदार कि तब यह पहली घटना बनी।
गोपेश्वर के बांज के जंगल की सुरक्षा में महिला मंगल दल की सदस्याओं के साथ मृत्यु पर्यन्त तक सक्रिय भागीदारी निभाती रही।
वर्ष 1975 में बांज के जंगल को बचाने में सक्रिय रही तथा गांव की महिलाओं के साथ मिलकर आंदोलन किया उस दौर में तत्कालीन जिला अधिकारी अजय कुमार रस्तोगी से भी जंगल बचाने के लिए मुकाबला किया। इनके कर्मनिष्ठा का ही फल था कि पहली बार और वह भी आपातकाल के दौर में जिला अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से महिलाओं से माफी मांगनी पड़ी। समाज और जंगलों के संरक्षण के लिए संघर्षमय जीवन व्यतीत करते हुए सौ वर्ष की उम्र में इनका देहावसान हुआ।
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लेाकप्रिय पर्यावरण व्याख्यान माला श्यामा देवी स्मृति पर्यावरण व्याख्यान
