इन्सिट्यूट आफ टैक्नोलॉजी गोपेश्वर में हुआ चिरंजीलाल भट्ट पर्यावरण ब्याख्यान

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टाइम्स मैगजीन के 2007 के हीरो आंफ द एनवायरमेंट से सम्मानित सुप्रसिद्ध हिमनद विज्ञानी डा. डीपी डोभाल का कहना है कि हिमालय के हिमनदों के संरक्षण के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जाने की जरुरत है। ग्लोबल वार्मिंग का सबसे अधिक दुष्प्रभाव इन्हीं पर पड़ रहा है। हमें विकास और संरक्षण दोनों के साथ तालमेल के जरिए सामुहिक प्रयासों से हिमनदों के उपर मंडरा रहे खतरे को कम करने के लिए प्रयास करने होंगे।
ग्लेशियरों और विशेष कर हिमालय के ग्लेशियरों पर विशेष जानकारी रखने वाले वरिष्ठ हिम नद वैज्ञानिक डा , डी पी डोभाल ने कहा ग्लेशियर पृथ्वी पर जल के सबसे विस्वसनीय भंडार हैं । जो न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण के लिये महत्वपूर्ण हैं वरन प्राकृतिक संतुलन के लिये भी आवश्यक हैं
वाडिया इंस्टीट्यूट के सेंटर फार ग्लेशियरोंलांजी के प्रमुख विज्ञानी डा डी पी डोभाल ने यह बात इन्स्टीट्यूट आंफ टैक्नोलॉजी गोपेश्वर में स्वo चिरंजी लाल भट्ट पर्यावरण स्मृति ब्याख्यान के तहत हिमालय के हिमनद संसाधन और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव विषय में अपने संबोधन में कही।
ब्याख्यान का शुभारंभ स्व चिंरजी लाल भट्ट के चित्र पर माल्यार्पण से किया गया । डॉ डी पी डोभाल ने छात्रों को हिमनदों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि हिमालय क्षेत्र में 968 हिमनद है जो हमारी प्रमुख नदियों अलकनंदा भागीरथी सहित 51 नदियों के उद्गम के प्रमुख श्रोत है जिनमे अलकनंदा के उद्गम क्षेत्र में 407 भागीरथी के उद्गम क्षेत्र में 238 तथा यमुना के उद्गम क्षेत्र में 58 हिमनद है. जो हमारी जलापूर्ति के साथ साथ स्थानीय मौसम व तापमान को प्रभावित करते है. वर्तमान संदर्भ में देखा जाय तो जलवायु परिवर्तन का इन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है ये प्रकृति द्वारा मानव को सहज प्रदत्त जल बचत खाते हैं जिनमे यदि निकासी होती है तो उसी अनुपात मे जमा भी होनी चाहिये. लेकिन वर्तमान परिदृश्य में किये गये अध्ययन बताते है कि इनके भंडारण की दर में प्रतिवर्ष कमी आ रही है जो की भविष्य के लिए अच्छे संकेत नही है।
सन2004 में ही केदारनाथ के उपरी क्षेत्र में ग्लेशियर लेको से केदारनाथ में संभावित तबाही की आशंका अपनी रिपोर्ट के जरिए बता चुके इस विज्ञानी ने केदारनाथ हादसे के अनेक पक्षों पर प्रकश डाला।
इस दौरान उन्होंने छात्रों द्वारा हिमनदों के विषय में पूछे गये सवालों का भी जवाब दिया। डा डोभाल के हिमालय के ग्लेशियर पर किए गये अध्ययनों पर पुरी दुनिया में अलग पहचान बनायी है। दो घंटे के ब्याख्यान के दौरान हिमनदों और उसके विज्ञान को सरल भाषा में आमलोगों को बताया।
ब्याख्यान की अध्यक्षता करते हुए बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी बी डी सिंह ने छात्रों को कर्मशील बनने का शन्देश दिया और हिमालयी संस्कृति में शास्त्रीय पक्ष के जरिए ग्लेशियर और हिमालय के अस्तित्व और विराटता की जानकारी साझा की। इंजीनियरिंग कालेज के निदेशक के के एस मेर ने पर्यावरण के क्षेत्र में शोध हेतु आगे आने का आवाह्न किया।
इस अवसर पर कार्यक्रम डा. डोभाल को शाल ओढा कर तथा प्रतीक चिन्ह देकर तथा शांति प्रसाद भट्ट एवं को भी प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया
संस्थान में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान च प्र भ वि केंद्र के समाज सेवी मुरारीलाल ,भूगर्भ विद डॉ अरविंद भट्ट, मंगला कोठियाल, राकेश पंत, भरत सिंह सुरेंद्र सिंह विजय सती अंकित रावत दरबान सिंह पुष्पेंद्र झिंक्वांण तथा संस्थान के शिक्षको सहित कई गणमान्य लोग एवं छात्र उपस्थित थे
इस दौरान कार्यक्रम का संचालन संस्थान के शिक्षक अमित गैरोला ने किया।

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