केदार सिंह रावत पर्यावरण पुरूस्कार
- यह पुरूस्कार चिपको आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता स्व. केदार सिंह रावत की स्मृति में केन्द्र की ओर से दिया जाता है।
- 2015 से यह पुरूस्कार शुरू किया गया है।
2015 में पहला पुरूस्कार श्री अनुसूया प्रसाद भट्ट को दिया गया।
2016 में दूसरा पुरूस्कार श्री रमेश पहाड़ी को दिया गया।
2017 में तीसरा पुरूस्कार श्री शिशुपाल सिंह कुंवर को दिया गया।
- पुरूस्कार के लिए केन्द्र के प्रबंध न्यासी की अध्यक्षता में वर्तमान में एक कमेटी गठित की गई हैं जो हर साल पुरूस्कार के लिए योग्य व्यक्तियों में से उनके वन संरक्षण एवं समाजसेवा के लिए किए गए योगदान के आधार पर चयन करती है।
वर्तमान में पुरूस्कार के रूप में 21000/रु नगद, प्रशस्ती पत्र एवं अंगवस्त्र प्रदान किया जाता है।
स्व. केदार सिंह रावत का संक्षिप्त जीवन परिचय एवं कार्य विवरण।
स्व. श्री केदार सिंह रावत जी का जन्म चमोली जिला- अब रूद्रप्रयाग के मंदाकिनी की उपत्यका में गुप्तकाशी केदारनाथ मार्ग पर स्थित ग्राम न्यालसू-रामपुर में हुआ था। इनके पिता खेती-बाड़ी के साथ केदारनाथ यात्रा मार्ग के महत्वपूर्ण पड़ावों में से एक रामपुर पड़ाव पर दुकान का ंसचालन कर परिवार की आजीविका चलाने के लिए कार्य करते थे। उस दौर में गुप्तकाशी से आगे केदारनाथ की की पैदल यात्रा होती थी और हर पांच और सात मील की दूरी पर चट्टी होती थी। यहां तीर्थयात्री रात निवास करते थे और दिन में स्वयं भोजन पकाते थे। रामपुर में भी केदारनाथ यात्रा की चट्टी थी और केदारसिंह जी के पिताजी यहीं दूकान चलाते थे।
वर्ष 1961 के सितम्बर महिने में सर्वोदय के मीमांसक आचार्य दादा धर्माधिकारी उत्तराखण्ड की यात्रा पर आये थे रामपुर न्यालसू चट्टी में उनका पड़ाव केदार सिंह के जीवन की दिशा बदलने वाला बना। केदारसिंह रावत उस वक्त जूनियर हाईस्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। जब उन्हें पता चला कि सर्वोदय के कार्यकर्ता अयो है तो उन्होंने दादा धर्माधिकारी जी से सहज भाव से सर्वोदय के बारे में जानने की उत्सुकता में सवाल किया कि ‘ सर्वोदय क्या है ?’ दादा ने उनकी नोट बुक पर सर्वोदय का अर्थ लिखाया। तब से वे सर्वोदय आंदोलन से जुड़ गए।
उत्तराखण्ड सर्वोदय मण्ड द्वारा आयोजित भूदान और ग्रामदान अभियान में सम्मिलित रहे। 1966 में चंद्रापुरी शराबबंदी आंदोलन में भी सम्मिलित हुए।
1973 में मण्डल में चिपको आंदोलन की सफलता के बाद साईमन कम्पनी को वन विभाग ने पेड़ों का आवंटन बड़ासू गांव की उपरी भाग में स् िथत सीला के जंगल में इसकी जानकारी मिलते ही केदारसिंह रावत ने स् थानीय कार्यकर्ताओं के सहयोग से 22 जून से 27 जून 1973 को सोनप्रयाग से गुप्तकाशी के बीच विशाल जन-जागरण अभियान एवं रैली का आयोजन किया। जिसके फलस्वरूप साईमन कम्पनी के ठेकेदार,पेड़ों का छपान बीच में छोड़कर वापस लौट आये। पुनः दिसम्बर 1973 में कम्पनी के लोग पेड़ों के काटने के लिए जंगल पहुंचे तो केदार सिंह रावत की अगुवायी में फिर आंदोलन चला जिसमें ठेकेदार ने चार पेड़ तो काट दिए लेकिन पांचवें पेड़ पर कुल्हाड़ा चलाने तक चिपकों के प्रदर्शनकारी जंगल में पहुंच गए और कटते पेड़ पर केदार सिंह के साथ अनुसूया प्रसाद भट्ट ने अंगल्ठा लगा कर चिपक गए। जिससे वह अधकटा पेड़ कटने से बच गया। इसके बाद ठेकेदार और वन विभाग के लोगों को जंगल छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। और सीला का सम्पन्न जंगल कटने से बच गया।
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ओमप्रकाश भट्ट
प्रबंध न्यासी।
